कालसर्प दोष को समझें
कालसर्प दोष (Kalsarpa Dosha) संस्कृत के “काल” (समय/मृत्यु) और “सर्प” (सांप) से मिलकर बना है। यह योग तब बनता है जब सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच एक ही अर्धगोले में स्थित होते हैं — जैसे एक सांप के मुंह और पूंछ के बीच फंसे हों।
“कालसर्प दोष सिर्फ बाधा नहीं, बल्कि असाधारण focus और transformation की क्षमता भी दे सकता है।”
प्रमुख प्रकार
राहु 1st भाव में - स्वास्थ्य और आत्मविश्वास से जुड़ा।
राहु 2nd भाव में - धन और वाणी से संबंधित।
राहु 3rd भाव में - साहस और भाई-बहनों से जुड़ा।
राहु 7th भाव में - विवाह और partnerships को प्रभावित करता है।