दशा प्रणाली को समझें
Vedic astrology में आपकी जन्म कुंडली (Kundli) बताती है कि आपके जीवन में क्या promised है, लेकिन विंशोत्तरी दशा बताती है कि यह वादे कब पूरे होंगे।
“कुंडली संभावनाओं का नक्शा है, दशा उस यात्रा का समय-सारणी है।”
जानें आपकी current महादशा और अंतर्दशा कौन सी है — जीवन में “कब” की सटीक जानकारी।
Vedic astrology में आपकी जन्म कुंडली (Kundli) बताती है कि आपके जीवन में क्या promised है, लेकिन विंशोत्तरी दशा बताती है कि यह वादे कब पूरे होंगे।
“कुंडली संभावनाओं का नक्शा है, दशा उस यात्रा का समय-सारणी है।”
विंशोत्तरी दशा Vedic astrology की सबसे प्रचलित timing पद्धति है। यह 120 साल के चक्र को 9 ग्रहों के बीच बांटती है, जो बताती है कि आपके जीवन में कब कौन सा ग्रह प्रभावी रहेगा। यह आपकी कुंडली में “कब” की जानकारी देती है।
महादशा एक बड़ी अवधि है (जैसे शनि की महादशा 19 साल की होती है), जबकि अंतर्दशा महादशा के अंदर की उप-अवधि है। हर महादशा में सभी 9 ग्रहों की अंतर्दशा एक क्रम में आती है, जो घटनाओं के सटीक समय को बताने में मदद करती है।
आपकी दशा जन्म नक्षत्र से तय होती है। जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, वह पहली महादशा और उसका शुरुआती balance decide करता है। इसलिए exact जन्म समय जानना बहुत ज़रूरी है।
सूर्य - 6 साल, चंद्र - 10 साल, मंगल - 7 साल, राहु - 18 साल, गुरु - 16 साल, शनि - 19 साल, बुध - 17 साल, केतु - 7 साल, शुक्र - 20 साल। कुल मिलाकर 120 साल का चक्र पूरा होता है।
नहीं, हर दशा का असर उस ग्रह की आपकी कुंडली में स्थिति पर निर्भर करता है। अगर ग्रह शुभ भाव में मजबूत है, तो उसकी दशा अच्छे परिणाम दे सकती है। यह सामान्यीकरण नहीं, बल्कि पूरी कुंडली के विश्लेषण से समझा जाता है।